
ग्रामीण पुस्तकालय मलवे में तब्दील
आज का समाज शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ा है, घर – घर शिक्षा का अधिकार मिला है और सरकार शिक्षा पर अच्छी धनराशि खर्च भी कर रही है। पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर पर स्कूल – कॉलेज खोले जा रहे हैं, दशा – दिशा में सुधार भी आए हैं। बावजूद इसके खटकने वाली बात तो यह है की एक जमाना था जब लगभग गांव में पुस्तकालय हुआ करता था, जहां शाम के गांव के कम पढ़े-लिखे लोग भी पहुंचते थे। इससे शैक्षणिक वातावरण का न केवल माहौल बनता था, बल्कि मिल- बैठकर कुछ बेहतर विचार – विमर्श भी हुआ करता था। मगर सामाजिक विकास के आधुनिकता के दौर में आज ग्रामीण पुस्तकालय जमीनदोज हो रहे हैं।

ग्रामीण पुस्तकालय की दशा- दिशा का जिक्र करते हुए बताना है कि भगवानपुर प्रखंड अंतर्गत लखनपुर पंचायत के वार्ड नंबर- 14 में एक निजी पुस्तकालय 1992 मे खुला था जिसका भवन आज के तारीख में खण्डहर में तब्दील हो चुका है।
जमीनदाता निर्वाण प्रसाद यादव बताते है कि वर्ष 1992 में ग्रामीण पुस्तकालय की स्थापना मेरे द्वारा की गई थी, जिसके लिए एक कट्ठा जमीन में एक कमरा ही बनवाया था और सामने खाली जमीन थी ताकि समय आने पर विस्तार भी किया जा सके।शुरूआती दौर में लोगों ने दिलचस्पी दिखाई ,आते – जाते रहे।किन्तु घीरे- धीरे लोग मुंह मोड़ते चले गए।सरकारी लाभ भी कभी नही मिला। नतीजतन पुस्तकालय का अवशेष भी जस का तस पड़ा है।
