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राजनीति

हर्ल प्रबंधन द्वारा आगत अतिथियों को चादर, प्रतिक चिन्ह और पौधे देकर सम्मानित किया

 

बेगूसराय/ चूड़ामणि अनुभव

फुलेना पुष्पांशु

किसी क्षेत्र में जब बड़े या छोटे कल-कारखाने लगते हैं तो स्थानीय लोगों में आशा जगती कि अब हमारे क्षेत्र का विकास होगा, हमें रोजगार मिलेंगे, लेकिन जब स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार नहीं मिलता है, तो उनका मनोबल टूट जाता है। उनके सपने अधूरे रह जाते हैं। इसलिए कहीं पर भी कल-कारखानों स्थापित हों तो उनके प्रबंधन को स्थानीय बेरोजगार युवाओं को रोजगार देने में प्राथमिकता देना चाहिए। उन्हें प्रशिक्षित कर जॉब मुहैया भी होना चाहिए। जब प्रशिक्षण के बाद प्लेसमेंट की व्यवस्था होगी, तभी सक्षम जैसे कार्यक्रम सफल होंगे। यह बात बेगूसराय के सांसद सह केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने आज हिन्दूस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड, बरौनी (हर्ल) के सौजन्य से चलाये जा रहे ‘सक्षम’ कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर कही। उन्होंने आगे कहा कि बेगूसराय में भी यही हाल है । यदि बेगूसराय के बरौनी हर्ल कारखाना , एनटीपीसी बरौनी, तेल- शोधक कारखाना बरौनी या कोई भी कारखाना यदि स्थानीय युवाओं को रोजगार मुहैया कराने में प्राथमिकता नहीं देता है तो स्थानीय सांसद होने के नाते हम उनके गेट पर धरना देने से भी नहीं हिचकेंगे।
उन्होंने कहा कि भारत सरकार कौशल विकास के कार्यक्रमों को प्राथमिकता के आधार पर सहयोग करती है। हमारी सरकार का मानना है कि एक कुशल और स्कील पूर्ण युवा कई बेरोजगारों को रोजगार दे सकता है।इस अवसर पर हर्ल कारखाना के प्रमुख नितिन सक्सेना ने कहा कि हर्ल कंपनी अपने सामुदायिक कार्यो में कभी पीछे नहीं रहा। यह सक्षम कार्यक्रम इसी सामाजिक दायित्व का एक भाग है। यह कार्यक्रम हर्ल कारखाना का परिवर्तनकारी अभियान है।
स्थानीय तेघड़ा विधायक रजनीश कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का कोई भी प्रशिक्षण कार्यक्रम तब तक अच्छा नहीं होता है जबतक कि प्रशिक्षित बच्चे स्वरोजगार में सक्षम ना हो जाए। उन्हें हुनरमंद बनाया जाए तथा जब वे हुनरमंद हो जाए तो उनके प्लेसमेंट की भी व्यवस्था हो।
सक्षम कार्यक्रम को मानव विकास संस्थान के डीजीएम शांतनु घोष ने कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा बिहार के बरौनी में दो प्रशिक्षण केंद्र खोले गये हैं ।पहला हर्ल कारखाना के गेट नंबर 2 के सामने नूरपुर पंचायत के चकबल्ली गांव में तथा दूसरा बरौनी ग्रामीण के बरौनी गांव में खोला गया है, जहां लगभग 875 बच्चों को प्रशिक्षित किया जाएगा। जिसमें कम्प्यूटर, कृषि, सेल्स प्रशिक्षण के अलावा कई प्रशिक्षण कार्यक्रम हैं।

 

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