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बिहार

अख़बार देख कर लगा मैं अपने शहर के करीब आ गया हूं

मेरा इस अखबार के लिए सभी तरह का सहयोग बना रहेगा- डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री

डॉ. ज़ियाउर रहमान जाफ़री
(हिन्दी विभाग )
संपर्क -बिहारशरीफ़, नालंदा

एक समय में बेगूसराय से बहुत सारे अखबार प्रकाशित हुआ करते थे. बेगूसराय टाइम्स, मुक्त कथन, सरज़मीं, कालधर्म,सत्य सिंधु, बाइसवीं सदी आदि में तो मैं पाबंदी से लिखा करता था,या यों कहें कि यह अखबार हमें लिखने की प्रेरणा देती थी। समय के साथ यह सारे अखबार बंद हो गए, और एक तरह से हम अपने साहित्य और खबरों से कट गए।


आज जब चूड़ामणि अनुभव का ताजा अंक कविवर अशांत भोला सिंह के माध्यम से प्राप्त हुआ, तो कितनी ही यादें सिमटकर एक गुलदस्ते में आ गई. अपने जिला से यह अखबार प्रकाशित होता देख हमें किसी पर्व -त्यौहार की तरह खुशी का अनुभव हुआ. एक सांस में पूरा अखबार पढ़ गया. सबसे बड़ी बात जहां हमने अपने गांव को अलग कर दिया है हम पर शहरीयत हावी हो गई है. गांव की खबरों तक हम नहीं पहुंच पाते। यह पत्रिका गांव की खबरों को ज्यादा अहमियत दे रही है. संपादकीय में अशांत भोला सिंह की यह फ़िक्र जायज है कि विकास गांव तक नहीं पहुंच पा रहा. नल -जल जैसी योजनाएं सरकार से यहां से चलती भी हैं तो महज़ कागजी बनकर रह जाती है।

गजल सम्राट दुष्यंत का एक शेर है –

यहां तक आते-आते सूख जाती हैं कई नदियां
हमें मालूम है पानी कहां ठहरा हुआ होगा

यह अखबार उस पानी की तलाश कर सकेगी हमें पूरा विश्वास है. इस समाचार पत्र ने साहित्य के लिए भी पर्याप्त स्पेस रखा है. हमेशा की तरह रामा मौसम की गजल अच्छी लगी. मेरा इस अखबार के लिए सभी तरह का सहयोग बना रहेगा।

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